अपने क्लाइंट जय शाह की तरफ से ‘द वायर’ के सवालों का जवाब देते हुए जय शाह के वकील ने यह चेतावनी दी थी कि जय शाह के कारोबारी लेन-देन को लेकर अगर कोई खबर की गई, तो इसका नकारात्मक कानूनी नतीजा निकलेगा.

वही गुजरात में बीजेपी ऊपर से शांत दिख रही है, पर असल में इसके पैर के नीचे से जमीन खिसक गई- राहुल  
राहुल ने दौरे के आखिरी दिन भी सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ आक्रामक तेवर जारी रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने राज्य में विकास को पागल कर दिया है जिसे उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में जीत के बाद पागलखाने से बाहर लाएगी।

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 राहुल ने यह भी दावा किया कि गुजरात में बीजेपी ऊपर से शांत दिख रही है, पर असल में इसके पैर के नीचे से जमीन खिसक गई है क्योंकि मोदी जी की इमेज पर भरोसा जताने वाली जनता अब उनकी सच्चाई समझ गई है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने गुजरात दौरे के आखिरी दिन बुधवार को दाहोद जिले के सलैया गांव पहुंचे। वहां उन्होंने संत कबीर मंदिर में पूजा की और श्रद्धालुओं के साथ भजन कीर्तन किया। इस साल राहुल 16वीं बार मंदिर की शरण में गए। इससे पहले, वे 15 मंदिरों में दर्शन कर चुके हैं। उनकी मंदिर यात्रा यूपी विधानसभा चुनाव से शुरू हुई थी। मंदिर जाने के मामले में राहुल ने नरेंद्र मोदी को पीछे छोड़ दिया है।

वही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह द्वारा न्यूज पोर्टल के खिलाफ दायर किए गए आपराधिक मानहानि के मुकदमे की बुधवार को सुनवाई होनी थी लेकिन मेट्रोपॉलिटिन अदालत को आज सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। वजह बनी शिकायतकर्ता के वकील के अदालत में उपस्थित न होना। इस वजह से सुनवाई स्थगित की गयी।

जय शाह के वकील ने अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट एस के गढ़वी से वक्त मांगते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता एसवी राजू अदालत में पेश नहीं हो सके क्योंकि वह उच्च न्यायालय में व्यस्त हैं। अदालत ने समय देते हुये मामले की सुनवाई 16 अक्तूबर तक स्थगित कर दी।

जय शाह ने एक खबर को लेकर सोमवार को मेट्रोपॉलिटिन अदालत में आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। खबर में दावा किया गया था कि उनकी फर्म टेंपल इंटरप्राइजेज का टर्नओवर भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद बेहद तेजी से बढ़ा।

मजिस्ट्रेट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत अदालती जांच (यह देखने के लिए कि मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं) का आदेश दिया था। अपनी याचिका में शाह ने ‘‘एक लेख के जरिए शिकायतकर्ता की मानहानि और छवि को नुकसान पहुंचाने पर प्रतिवादी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का अनुरोध किया था।’’

ज्ञात हो कि वायर ने खबर प्रकाशित की थी कि

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह की स्वामित्व वाली कंपनी का सालाना टर्नओवर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और पिता अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद 16,000 गुना बढ़ गया. ये बात रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) में दाखिल किए गए दस्तावेजों से सामने आई है.

कंपनी की बैलेंस शीटों और आरओसी से हासिल की गई वार्षिक रिपोर्टों से ये बात उजागर होती है कि 2013 और 2014 के मार्च में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्षों में शाह की टेंपल एंटरप्राइज़ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कोई ख़ास उल्लेखनीय कारोबार नहीं कर रही थी और इन वर्षों में कंपनी को क्रमशः 6,230 और 1,724 रुपये का घाटा हुआ. 2014-15 में कंपनी ने महज 50,000 के राजस्व पर 18,728 रुपये का लाभ दिखाया. 2015-16 में कंपनी का टर्नओवर आसमान में छलांग लगाते हुए बढ़कर 80.5 करोड़ रुपये को छू गया.

टेंपल एंटरप्राइज़ के राजस्व में यह हैरान करने वाली बढ़ोत्तरी एक ऐसे समय में हुई जब कंपनी को राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष एक्जीक्यूटिव परिमल नाथवानी के समधी राजेश खंडवाला के स्वामित्व वाली एक वित्तीय सेवा कंपनी से 15.78 करोड़ रुपये का असुरक्षित कर्ज मिला था.

हालांकि, एक साल बाद अक्टूबर, 2016 में जय शाह की कंपनी ने अपनी व्यापारिक गतिविधियों को अचानक पूरी तरह से बंद कर दिया. निदेशकों की रिपोर्ट में यह कहा गया कि पिछले वर्ष हुए 1.4 करोड़ रुपये के घाटे और इससे पहले के सालों में होने वाले नुकसानों के कारण कंपनी का नेटवर्थ पूरी तरह से समाप्त हो गया है.

‘द वायर’ ने गुरुवार को जय शाह को एक प्रश्नावली भेजी, जिसमें उनसे टेंपल एंटरप्राइज़ की संपत्ति में आए इस उतार-चढ़ाव और आरओसी के दस्तावेजों के अनुसार उनके दूसरे कारोबारों का ब्यौरा देने की गुजारिश की गई. इस पर उन्होंने यह जवाब दिया कि वे यात्रा कर रहे हैं, इसलिए तुरंत इस बारे में कोई जवाब नहीं दे सकते हैं.

शुक्रवार को उनके वकील मानिक डोगरा ने इस चेतावनी के साथ जवाब भेजा कि अगर उनके क्लाइंट जय अमितभाई शाह पर ऐसा कोई आरोप लगाया जाता है, जो उन पर किसी तरह की गड़बड़ी करने का हल्का सा भी इशारा करता हो, तो इसका जवाब आपराधिक और सिविल मानहानि के मुकदमे से दिया जाएगा.

जैसा कि जाहिर है, आरओसी दस्तावेजों की कहानी विभिन्न कर्जों और राजस्वों से ज्यादा कुछ भी नहीं बताती, जिससे शाह के वकील ने भी इनकार नहीं किया है. दुनियाभर के लोकतंत्रों में नेताओं के रिश्तेदारों के कारोबारों की जांच-पड़ताल करना, खासकर अगर राजनीतिक ग्राफ के ऊपर चढ़ने के साथ संपत्ति में अचानक बदलाव दिखाई देता है, बेहद सामान्य बात है.

मिसाल के तौर पर यूपीए-2 के दौरान कांग्रेस पार्टी ने तीन सालों का एक बड़ा हिस्सा इन सवालों का सामना करते हुए गुजार दिया कि आखिर कैसे सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने कर्जों के सहारे, जिनमें रियल एस्टेट की बड़ी कंपनी डीएलएफ की तरफ से मिली असुरक्षित अग्रिम राशि भी शामिल है, अपने रियल एस्टेट कारोबार को बढ़ा लिया था.

हालांकि, शाह के वकील ने शाह द्वारा दी गई जानकारियों- वे फाइलिंग्स जिन्हें कंपनियों को अनिवार्य रूप से आरओसी में जमा करना होता है ताकि उन्हें सब सार्वजनिक तौर पर देख सकें और उनकी जांच की जा सके, को खारिज नहीं किया है. अगर शाह की तरफ से कोई जवाब आता है, तो ‘द वायर’ को उसे प्रकाशित करने में खुशी होगी.

टेंपल एंटरप्राइज़, 2004 में निगमीकृत हुआ और जय शाह और जितेंद्र शाह का नाम इसके निदेशकों के तौर पर दर्ज किया गया. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पत्नी सोनल शाह की भी इस कंपनी में हिस्सेदारी थी.

2014-15 में टेंपल एंटरप्राइज़ के पास कोई अचल संपत्ति नहीं थी. न ही इसके पास कोई इनवेंट्री या स्टॉक था. इसे 5,796 रुपये का इनकम टैक्स रिफंड भी मिला. 2014-15 में इसने 50,000 रुपये के राजस्व की कमाई की. लेकिन 2015-16 में कंपनी का राजस्व आश्चर्यजनक ढंग से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपये हो गया. यह 16 लाख प्रतिशत की वृद्धि थी.

रिज़र्व और सरप्लस पिछले साल के 19 लाख से घटकर -80.2 लाख हो गया. पिछले साल जहां इसकी कारोबार देनदारियां 5,618 रुपये की थी, वह इस साल 2.65 करोड़ रुपये हो गई. जबकि कंपनी की परिसंपत्ति (एसेट) सिर्फ 2 लाख थी. इससे एक साल पहले इस फर्म की कोई अचल परिसंपत्ति नहीं थी.

एक साल पहले जहां कम मियाद के कर्जे और पेशगी के तौर पर ली गई रकम कुल 10,000 रुपये की थी, वहीं यह बढ़कर इस साल 4.14 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल जहां गोदामों में कुछ नहीं था, वहीं इस साल यह बढ़कर 9 करोड़ के बराबर का हो गया.

राजस्व में होने वाली इस भारी बढ़ोत्तरी को फाइलिंग में ‘उत्पादों की बिक्री’ से हुई प्राप्ति के तौर पर दिखाया गया है. इसमें 51 करोड़ रुपये की विदेशी आय भी शामिल है. एक साल पहले विदेशी आय भी शून्य थी.

इस फाइलिंग से केआईएफएस नामक लिस्टेड कंपनी से 15.78 करोड़ के असुरक्षित कर्ज का भी पता चलता है. उसी वित्तीय वर्ष के लिए, यानी जिस साल कर्ज दिया गया, केआईएफएस का राजस्व 7 करोड़ रुपये था. केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के वार्षिक रिपोर्ट में भी टेंपल एंटरप्राइज़ को दिए गए 15.78 करोड़ के असुरक्षित कर्जे का कोई जिक्र नहीं मिलता है.

केआईएफएस फाइनेंशियल

केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमोटर राजेश खंडवाला पहले गुरुवार को ‘द वायर’ द्वारा भेजी गई प्रश्नावली का जवाब देने के लिए तैयार हो गए, जिसमें शाह की कंपनी के साथ उनकी कंपनी के लेन-देने के बारे में स्पष्टीकरण मांगी गई थी. लेकिन बाद में उन्होंने फोन कॉल्स और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया. केआईएफएस, एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी है जिसके काम पर कुछ साल पहले सेबी ने सवाल उठाए थे.

खंडवाला की बेटी, परिमल नाथवानी के बेटे के संग ब्याही गई है. अहमदाबाद के नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के गुजरात ऑपरेशंस के मुखिया हैं. वे अपना एक पैर राजनीति में तो दूसरा पैर व्यापार में रखकर काम करते रहे हैं. वे राज्यसभा के एक निर्दलीय सांसद हैं. 2014 में भाजपा के झारखंड के विधायकों के समर्थन से वे राज्यसभा में फिर से चुनकर पहुंचे थे.

अमित शाह के एक करीब सूत्र ने इस रिपोर्टर को बताया कि खंडवाला के फर्म द्वारा टेंपल एंटरप्राइज़ को असुरक्षित कर्ज देने में न तो नाथवानी और न ही रिलायंस की कोई भूमिका थी. दूसरी तरफ जय शाह के वकील ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि खंडवाला पुराने पारिवारिक मित्र हैं.

शाह के वकील के मुताबिक़:

‘केआईएफएस के प्रमोटर राजेश खंडवाला, पिछले कई वर्षों से जय शाह के परिवार के लिए शेयर ब्रोकर का काम कर रहे हैं. इस गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने जय शाह और जितेंद्र शाह के दूसरे कारोबारों को पिछले कई सालों से नियमित तौर पर कर्ज उपलब्ध कराया है. जय शाह का राजेश खंडवाला के साथ पारिवारिक रिश्ता, चार साल पहले नाथवानी के बेटे के खंडवाला की बेटी से शादी से भी पहले का है.’

कर्ज के बारे में पूछे गये सवालों को लेकर जय शाह के वकील ने लिखा है :

‘जय शाह, जितेंद्र शाह और उनके सहयोगियों ने इस कंपनी (टेंपल एंटरप्राइज़) में शेयर पूंजी और असुरक्षित कर्जों का निवेश किया है. चूंकि नए करोबार/कंपनी को कामकाजी पूंजी उपलब्ध नहीं थी, इसलिए व्यापार को चलाने के लिए समय-समय पर केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड से ब्याज वाले इंटर कॉरपोरेट डिपॉजिट्स (आईसीडी) लिए गए थे, जो कि एक रजिस्टर्ड गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है. चुकाए गए ब्याज पर टैक्स (टीडीएस) भी नियमित तौर पर चुकाया गया है और ब्याज की पूरी राशि का पूरा भुगतान कर दिया गया है.’

2015 में, यानी कि उसी साल जिस साल केआईएफएस ने शाह के फर्म को असुरक्षित कर्ज मुहैया कराया, खंडवाला और शाह ने एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी)- सत्व ट्रेडलिंक की स्थापना की. हालांकि, इसे बाद में खत्म कर दिया गया. ‘द वायर’ ने जय शाह से सत्व ट्रेड लिंक्स के अलावा खंडवाला के साथ उनके अन्य लेन-देन को स्पष्ट करने के लिए कहा था. शाह की तरफ से जवाब देते हुए वकील ने कहा: हालांकि यह एलएलपी जय शाह और खंडवाला द्वारा गठित की गई थी, लेकिन बाजार के प्रतिकूल हालातों को देखते हुए इसके तहत कोई कारोबार नहीं किया गया और इस एलएलपी को समाप्त कर दिया गया और इसे बहुत पहले ही रजिस्टर्ड रिकॉर्ड से हटा दिया गया है.’

यह स्पष्ट नहीं है कि ‘प्रतिकूल बाजार परिस्थितियों’ से शाह के वकील का अभिप्राय क्या है? क्योंकि जिस साल एलएलपी गठित की गई, उसी साल खंडवाला के फर्म ने 15.78 करोड़ रुपये शाह की कंपनी को कर्जे के तौर पर दिए और कंपनी ने 80.5 करोड़ रुपये का राजस्व दिखाया.

खंडवाला से खासतौर पर पूछे गये सवाल कि आखिर क्यों केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज की वार्षिक रिपोर्ट में जय शाह की कंपनी को दिए गए कर्जे के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया, का कोई जवाब नहीं मिला.

शाह की आरओसी फाइलिंग के मुताबिक टेंपल एंटरप्राइज़ को थोक व्यापार में लगी कंपनी बताया गया है जिसके कुल कारोबार में 95 फीसदी हिस्सा कृषि उत्पादों की बिक्री से आता है. शाह के वकील के बयान में कहा गया है, ‘टेंपल एंटरप्राइज़ रैपसीड, डीओसी, कैस्टर डीओसी मील, देसी चना, सोयाबीन, धनिया के बीज, गेहूं, चावल, मक्का आदि कृषि उत्पादों के आयात और निर्यात का कारोबार करता है.’

इस बयान में शाह के बिजनेस पार्टनर जितेंद्र जयंतीलाल शाह के कारोबारी दिमाग और अमित शाह के बेटे को मिली शिक्षा को कंपनी के प्रदर्शन का श्रेय दिया गया है:

‘इस कारोबार का मालिकाना हक और उसका प्रबंधन मुख्य तौर पर जय शाह और जितेंद्र शाह (एक पुराने पारिवारिक मित्र) और उनके सहयोगियों के पास था. जय शाह एक क्वालिफाइड इंजीनियर हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित निरमा यूनिवर्सिटी से अपनी बीटेक की पढ़ाई की है और जितेंद्र शाह पहले ही कई सालों से कमोडिटीज के बिजनेस में लगे हुए हैं और उनकी कंपनियां 100 करोड़ से ज्यादा का वार्षिक कारोबार कर रही थीं.’

शाह के वकील ने यह भी कहा कि कमोडिटी व्यापार में 80 करोड़ का टर्नओवर ‘असमान्य ढंग से ज्यादा’ नहीं कहा जा सकता.

जो बात थोड़ी असामान्य लगती है, वह यह है कि एक फर्म जिसकी प्राप्तियां एक साल में ही- वित्तीय वर्ष (2015-16) में महज 50,000 रुपये से बढ़कर 80 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हो, उसने पिछले साल अपना कारोबार बंद कर दिया.

बयान में कहा गया है, ‘बदकिस्मती से टेंपल एंटरप्राइज़ प्राइवेट लिमिटेड की व्यापारिक गतिविधियों से घाटा हुआ, जिसके कारण 2016 के अक्टूबर में कभी इस कारोबार को बंद कर दिया गया.’

स्टॉक ट्रेडिंग से बिजली उत्पादन जेनरेशन तक

कुसुम फिनसर्व जुलाई 2015 में शुरू की गई एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप है, जिसमें जय शाह की 60 फीसदी हिस्सेदारी है. एलएलपी में बदले जाने से पहले यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हुआ करती थी. इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को भी वित्तीय वर्ष 2014-15 में केआईएफएस फाइनेंशियल से 2.6 करोड़ के बराबर का इंटर कॉरपोरेट डिपॉजिट्स् मिला. अंतिम फाइलिंग के मुताबिक इस पार्टनरशिप ने 24 करोड़ की कमाई की.

इस फाइलिंग से 4.9 करोड़ रुपये के असुरक्षित कर्ज की बात भी सामने निकल कर आती है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया है कि आखिर इस कर्ज का स्रोत क्या है? शाह के वकील का कहना है कि कुसुम फिनसर्व का मुख्य कारोबार स्टॉक और शेयरों की ट्रेडिंग, आयात-निर्यात गतिविधियां और डिस्ट्रीब्यूशन एंड मार्केटिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का है.’

वे यह भी जोड़ते हैं कि केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज इसे नियमित तौर पर कर्ज देता रहा है. बयान के मुताबिक, ‘यह कंपनी पिछले कई सालों से केआईएफएस से नियमित तौर पर आईसीडी/कर्ज लेती रही है और 4.9 करोड़ की रकम बकाया क्लोजिंग बैलेंस थी. इन रकमों का उपयोग नियमित कामकाजी पूंजी के तौर पर किया गया. चुकाए गए ब्याज पर कर (टीडीएस) चुकाया गया है और मूलधन और ब्याज की राशि को पूरी तरह से चुका दिया गया है.

हालांकि, इस फर्म का मुख्य कारोबार स्टॉकों की ट्रेडिंग है, लेकिन इसकी आरओसी फाइलिंग से पता चलता है कि यह कई अलग-अलग कारोबारों में शामिल है, जिनका आपस में कोई ताल्लुक नहीं है. यह मध्य प्रदेश के रतलाम में 15 करोड़ रुपये की लागत वाली 2.1 मेगावाट क्षमता की विंडमिल (पवन चक्की) भी लगा रही है.

कॉरपोरेट बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से मिले ऋण

आरओसी में शाह की फाइलिंग से कालूपुर कॉमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक से 25 करोड़ के बराबर की वित्तीय सहायता का पता चलता है. इस बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में निरमा ग्रुप और निरमा यूनिवर्सिटी के लोग शामिल हैं. इस बैंक के चेयरमैन एमिरिटस निरमा के अंबूभाई मगनभाई पटेल हैं.

गिरवी रखी गई संपत्तियों में एक अमित शाह के स्वामित्व वाली है, जिसकी कीमत 5 करोड़ बताई गई है. दूसरी संपत्ति अमित शाह के एक सहयोगी यशपाल चूडास्मा द्वारा 2014 में कुसुम फिनसर्व को हस्तांतरित की गई है. शाह ने इस 2002 वर्ग फीट की इस संपत्ति का मूल्य नहीं बताया है, लेकिन बाजार के अनुमानों के मुताबिक इसकी कीमत 1.2 करोड़ के आसपास है.

अहमदाबाद जिला कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व निदेशक, चूडास्मा पर 2010 में सीबीआई ने -अमित शाह- की तरफ से गवाहों को सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी के फर्जी इनकाउंटर केस में सीबीआई के सामने सच न बताने के लिए मनाने, डराने और धमकाने की कोशिश करने के लिए चार्जशीट दाखिल किया था. 2015 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले से चूडास्मा को बरी कर दिया, वैसे ही जैसे दिसंबर, 2014 में अमित शाह को भी बरी कर दिया गया था.

यह पूछे जाने पर कि आखिर किस तरह कुसुम फिनसर्व एक सहकारी बैंक से 7 करोड़ की जमानती संपत्ति पर 25 करोड़ रुपये का कर्ज लेने में कामयाब रही और क्या दूसरी संपत्तियों को भी गिरवी रखा गया था, जय शाह के वकील का जवाब था: बैंक ने फर्म को ‘कर्ज’ नहीं दिया था, बल्कि इसकी जगह ’25 करोड़ रुपये तक का लेटर ऑफ़ क्रेडिट (एलसी), ‘नॉन फंड बेस्ड वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी’ के तौर पर उपलब्ध कराया था.

वकील के बयान में कहा गया है कि इस सुविधा का इस्तेमाल समय-समय पर किया जाता है. इस बयान में यह भी कहा गया है कि ‘यह सुविधा सामान्य बैंकिंग शर्तों पर हासिल की गई है, जिसके तहत एलसी के तहत सामान की खरीदारी का अनुमान,10 फीसदी की कैश मार्जिन और जय शाह के पिता के स्वामित्व वाली संपत्ति और कुसुम फिनसर्व (जिसे 5 अप्रैल, 2014 को खरीदा गया) की एक दूसरी संपत्ति की जमानत शामिल है. यह बात अप्रैल 2014 से मार्च, 2015 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट में भी देखी जा सकती है.’

शाह के वकील ने बताया कि बैंक को इस एलसी के समाप्त होने से पहले अपने नियत तारीख को ही भुगतान मिल जाता है, जिससे यह बैंकों के लिए नॉन-फंडेड, बगैर जोखिम वाली सुविधा बन जाती है.

कोऑपरेटिव बैंक के अलावा, जय शाह की पार्टनरशिप ने मार्च, 2016 में एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम- इंडियन रिन्यूएबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (आईआरईडीए) से भी 10.35 करोड़ का कर्ज लिया है. इसकी वेबसाइट के मुताबिक यह एक मिनीरत्न कंपनी है. यह कंपनी नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करती है. जिस समय यह कर्ज मंजूर किया गया, उस समय पीयूष गोयल इसके मंत्री थे.

शाह के वकील का कहना है कि ‘2.1 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आईआरईडीए से लिया गया कर्ज उस समय इंडस्ट्री मानकों के हिसाब से उपकरणों की कीमत (करीब 14.3 करोड़) पर आधारित है. इसकी बाकायदा समीक्षा की गई थी और साधारण व्यापार के तहत इसे उपलब्ध कराया गया था. 30-06-17 को कुल बकाया कर्ज 8.52 करोड़ है और ब्याज और कर्ज की पुनर्अदायगी नियमित तौर पर की जा रही है.’

जो बात स्पष्ट नहीं होती, वह है वह मानक, जिसके आधार पर एक पार्टनरशिप, जिसका मुख्य कारोबार, शाह के वकील के मुताबिक, ‘स्टॉकों और शेयरों की ट्रेडिंग, आयात-निर्यात गतिविधियां और डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग कंसल्टेंसी सर्विसेज है, 2.1 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना के लिए आवदेन करने का फैसला किया और उसे इसके लिए कर्ज भी मिल गया, जबकि उसके पास बुनियादी ढांचा या बिजली क्षेत्र का कोई पूर्व अनुभव नहीं था. कर्ज देने की नीति के बारे में जानकारी लेने के लिए ‘द वायर’ ने आईआरईडीए से भी संपर्क साधा है और इसका जवाब आने पर इसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.

शाह के वकील से मिली धमकी

अपने क्लाइंट जय शाह की तरफ से ‘द वायर’ के सवालों का जवाब देते हुए जय शाह के वकील ने यह चेतावनी दी कि जय शाह के कारोबारी लेन-देन को लेकर अगर कोई खबर की गई, तो इसका नकारात्मक कानूनी नतीजा निकलेगा.

‘ऊपर दिए गए जवाबों और स्पष्टीकरण की रौशनी में सारे तथ्य पूरी तरह से साफ हैं और आपसे यह आग्रह है कि आप इस बारे में कोई खबर प्रकाशित न करें, जो न केवल मेरे क्लाइंट की निजता पर हमला होगा, बल्कि जो बदनाम करने वाला और/या मानहानि करने वाला भी होगा.’

‘जय शाह एक प्राइवेट सिटीजन हैं, जो कानूनों के तहत अपना कारोबार कर रहे हैं. उनके कारोबारी लेन-देन ईमानदार, कानूनी और प्रामाणिक हैं. आपकी प्रश्नावली से ऐसा लगता है कि आपका इरादा उन्हें एक झूठे और मनगढ़ंत विवाद में घसीटना है. कोई ऐसा आरोप जिससे उनके तरफ से कोई गलत काम करने का हल्का सा भी आभास जाएगा, वह न सिर्फ झूठा बल्कि दुर्भावना से प्रेरित और बदनाम करने वाला भी होगा. यह निजता के उनके मौलिक अधिकार का हनन भी होगा. ऐसी स्थिति में उनके पास आपके खिलाफ मानहानि और गलत आचरण करने का मुकदमा दायर करने का अधिकार होगा.

इन सब बातों के अलावा, अगर आप या प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया में कोई भी, मेरे क्लाइंट के खिलाफ कोई बदनाम करने वाला और/या झूठा आरोप लगाता है, या कोई ऐसा आरोप लगाता है जो निजता के उनके मौलिक अधिकार का हनन करता है/या उन्हें बदनाम करता है, तो शाह के पास उस व्यक्ति/इकाई, जो ऐसे बदनाम/मानहानि करने वाले आरोपों को प्रसारित करता है या दुहराता है’ के खिलाफ मुकदमा करने का अधिकार होगा.

(रोहिणी सिंह इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टर हैं, जो कुछ समय पहले तक इकोनॉमिक टाइम्स से जुड़ी थीं. 2011 में उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा की डीएलएफ के साथ हुई डील का खुलासा किया था.)

नोट: इस लेख में पहले बताया गया था कि वित्त वर्ष 2015-16 में टेम्पल एंटरप्राइज का रिज़र्व और सरप्लस बढ़कर 80.2 लाख हो गया था जबकि इसके पिछले साल की तुलना में यह नेगेटिव था.
2015-16 के अंत में जांच के मुताबिक कंपनी के टर्नओवर में हुई भारी बढ़ोतरी के लिहाज से कंपनी का रिज़र्व नगण्य/उल्लेखनीय नहीं है।